Tuesday, September 10, 2013

थाम लो एक बार फि‍र.....


छीज रही है
मेरे अंदर से
वो सभी कोमल भावनाएं
जो तुम्‍हारे होने से
भर गई थी मुझमें

आओ 'नील'
थाम लो
एक बार फि‍र
फूंक दो अपनी सांसे
मेरे नि‍ष्‍प्राण होते
बदन में

खुरदरे हो आए अंतस को
सहला दो
भर दो मुझमें प्रेमावेग
अपने जादुई व्‍यक्‍ति‍त्‍व के
प्रभाव से

ले जाओ मुझे
स्‍वर-लहरि‍यों की
कश्‍ती में बि‍ठाकर
प्रेम के गांव में

कि भावनाओं का छीजना
तुमसे दूर होना
प्रेम-स्रोत का सूख जाना
वैसा ही है जैसे
सरस्‍वती का थार में
वि‍लुप्‍त हो जाना.....


तस्‍वीर..साभार गूगल 

13 comments:

madhu singh said...

बहुत सुन्दर एवम् भावपूरित

Aziz Jaunpuri said...

बहुत सुन्दर

Rajesh Yadav said...

बहुत खूब !
बधाई स्वीकार करें !

हिंदी फोरम एग्रीगेटर पर करिए अपने ब्लॉग का प्रचार !

Anonymous said...

वाह वाह क्या बात है

Anonymous said...

वाह वाह क्या बात है

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" में शामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल {बृहस्पतिवार} 12/09/2013 को क्या बतलाऊँ अपना परिचय - हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल - अंकः004 पर लिंक की गयी है ,
ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें. कृपया आप भी पधारें, सादर ....राजीव कुमार झा

Aparna Bose said...

speechless … बहुत उम्दा… एक एक शब्द दिल के तारों को झंकृत करता हुआ…

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी
पोस्ट हिंदी
ब्लॉगर्स चौपाल
में शामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल
{बृहस्पतिवार}
12/09/2013
को क्या बतलाऊँ अपना
परिचय ..... - हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल - अंकः004
पर लिंक की गयी है ,
ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें. कृपया आप भी पधारें, आपके
विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें. सादर ....राजीव कुमार झा

दिलबाग विर्क said...

आपकी यह प्रस्तुति 12-09-2013 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत है
कृपया पधारें
धन्यवाद

मदन मोहन सक्सेना said...

खूबसूरत अभिव्यक्ति …!!गणेशोत्सव की हार्दिक शुभकामनायें.
कभी यहाँ भी पधारें।
सादर मदन

Reena Maurya said...

बेहद सुन्दर..
लाजवाब..:-)

Darshan jangra said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - शुक्रवार - 13/09/2013 को
आज मुझसे मिल गले इंसानियत रोने लगी - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः17 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra





कालीपद प्रसाद said...

बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति
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