Friday, December 13, 2019

कुहासे का स्‍वेटर


सूरज ने पहना
कुहासे का स्वेटर
और
बच्चों की तरह
हौले-हौले
कदम रख चल पड़ा है
आकाश के पथ पर
सफर में अपने
एक-एक कर खोलेगा वो
स्वेटर के सारे बटन
और
शर्माई सी धूप
गुनगुना उठेगी
खिलखिला उठेगी......

4 comments:

Anita saini said...

जी नमस्ते,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार(१४-१२-२०१९ ) को " पूस की ठिठुरती रात "(चर्चा अंक-३५४९) पर भी होगी।
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है
….
अनीता सैनी

शुभा said...

वाह!रश्मि जी ,बहुत खूब!!

दिगंबर नासवा said...

बहुत सुंदर ...
मौसम में डुबोए मन के भाव ...

Anuradha chauhan said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति