Sunday, September 29, 2019

एक दि‍न......


वक्‍त नहीं होता
अब
जरूरत भी नहीं रहेगी...

जैसे आया था चुपचाप
वैसे ही
चला जाएगा प्रेम भी
एक दि‍न......

3 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (01-10-2019) को     "तपे पीड़ा  के पाँव"   (चर्चा अंक- 3475)  पर भी होगी। 
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

दिगंबर नासवा said...

बहुत खूब ...
चला जाएगा प्रेम भी एक दिन और रह जायेंगी उसकी यादें ...

Onkar said...

सुन्दर रचना