Monday, April 4, 2016

फूल...


खि‍ला हूं..नि‍हार लो...
कल मुरझाना ही है
वक्‍त रहते समेट लो
यादों में..ख्‍यालों में
हरदम खि‍ला ही रहेगा
रहती कायनात तक......


1 comment:

kuldeep thakur said...

आपने लिखा...
कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 06/04/2016 को पांच लिंकों का आनंद के
अंक 264 पर लिंक की गयी है.... आप भी आयेगा.... प्रस्तुति पर टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।