Wednesday, April 6, 2016

वो प्यार था ....



आज सुबह-सुबह यूं ही एफ एम लगा लि‍या। अचानक गाना सुनाई पड़ा...छुपा लो दि‍ल में यूं प्‍यार तेरा कि‍ जैसे मंदि‍र में लौ दि‍ए की।
एकदम से कौंध गई सारी बातें पुरानी। रेडि‍यो जॉकी ने बताया कि‍ आज सुचि‍त्रा सेन का जन्मदि‍न है। कुछ चीजें कैसे खुद को यादों में समेट कर रखती हैं, ये उस वक्‍त पता नहीं लगता। मगर कभी वो परि‍स्‍थति‍ सामने आती है तो सब कुछ याद आने लगता है।

इन्‍हीं दि‍नों की बात थी। कोयल कूकते थे सब तरफ। आम्र मंजरि‍यां बौराई सी दि‍खती थी। चैत की हवा कभी गर्म, कभी थोड़ी ठंढ़ी। सूरज जल्‍दी उगता तो सुबह भी जरा जल्दी नींद खुलती थी। मन अच्छा-अच्छा सा उन दि‍नों। शायद प्‍यार दि‍ल में पैठ बना रहा था।

तुम तब पूरी कोशि‍श में लगे थे मुझे इम्‍प्रेस करने के। जि‍तना ज्यादा वक्‍त दे सकते थे, मुझे देने की कोशि‍श करते। हर सुबह हम फोन पर बातें करते। तुम मि‍नट भर के लि‍ए भी मुझे अकेला नहीं छोड़ना चाहते थे। रोज मि‍लने की जि‍द। मुमकि‍न नहीं था हमारा यूं मि‍लना। तो तुम फोन और एसएमएस से जुड़े रहते थे मुझसे। तब व्‍हाटसएप नहीं आया था। हर पांच मि‍नट के बाद एक एसएमएस। क्‍या कर रही हो...क्‍या पहना है, क्‍या खाया है।
सब कुछ जैसे जानना चाहते थे तुम। तब गाने भी खूब गाते थे तुम। मुझे याद नहीं कि‍ कि‍तनी बार सुना है तुमको ये गाते हुए...छुपा लाे दि‍ल में यूं..... गहराई है तुम्‍हारी आवाज में। कानों से सीधे दि‍ल में उतरती थी।
मैं करीब और करीब होती गई। तुम हर जतन करते और कामयाबी की सीढ़ि‍यां चढ़ते जाते। मैं हर बीतते दि‍न में तुमसे जुड़ती जाती थी।
तब नहीं लगा था एक बार भी कि‍ कोई यूं कि‍सी पर पहले रि‍सर्च करता है फि‍र उसे अपने करीब लाता है। आज रेडि‍यो जॉकी ने अतीत का वो पन्ना पलट दि‍या, जि‍से मैं खोलना नहीं चाहती थी।

तस्‍वीर-गड़ेसर झील में उड़ते परि‍ंदे 

7 comments:

kuldeep thakur said...

आपने लिखा...
कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 07/04/2016 को पांच लिंकों का आनंद के
अंक 265 पर लिंक की गयी है.... आप भी आयेगा.... प्रस्तुति पर टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।

Kavita Rawat said...

जो मन में बस जाता है उसे कभी भुलाया नहीं जाता ..

Dilbag Virk said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 07-03-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2305 में दिया जाएगा
धन्यवाद

महेश कुशवंश said...

साफ़गोई से कही, सच्ची बात,भूलती नहीं, कभी भी

महेंद्र मिश्र said...

बहुत सुन्दर.. नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं ...

Ashok Jairath said...

तस्वीरों से धूल हटाते रहना सुकून देता है ... लेखक की सच्चाई खालिस सोने का पानी है ...

Laxmi Kant Sharma said...

क्या लिखते हैं आप वाह बेहतरीन