Monday, October 7, 2013

जिंदगी शाम है......


जिंदगी शाम है
मैं सूना तट
और तुम समुंदर

गहराती रात के साथ
दूर होता जाता है
समुंदर
और वीरान होता है
सूखा तट
लहरों से बि‍छड़ने का
होता है
तीव्र मलाल

दर्द भरी हसरत लि‍ए
जागती है रात
आकुल हो राह
तकती है समंदर की
कि भोर की पहली कि‍रण देख
आवेग भरी लहरें
उद़दात होंगी
समुंदर को भी
तट से बि‍छुड़ने का
अहसास होगा

आएंगी लहरें,
प्‍यार लि‍ए
देने का अभि‍मान लि‍ए
भिंगोएगी
बार-बार और
लौट जाएंगी लहरें
फि‍र ढलेगी शाम
क्‍योंकि

जिंदगी शाम है
मैं सूना तट
और तुम समुंदर

तस्‍वीर...अरब सागर के कि‍नारे एक शाम की

13 comments:

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

खुबसूरत सी रचना ।

मेरी नई रचना :- सन्नाटा

रविकर said...

बढ़िया प्रस्तुति-
आभार आदरणीया-
नवरात्रि की शुभकामनायें-

अरुन शर्मा अनन्त said...

नमस्कार आपकी यह रचना कल मंगलवार (08-10-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

राजीव कुमार झा said...

बहुत खूबसूरत रचना .
नवरात्रि की शुभकामनाएँ .

पूरण खण्डेलवाल said...

सुन्दर प्रस्तुति !!

राजीव कुमार झा said...

इस पोस्ट की चर्चा, मंगलवार, दिनांक :-08/10/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक -20 पर.
आप भी पधारें, सादर ....राजीव कुमार झा

Rajesh Kumari said...

आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार ८ /१०/१३ को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां हार्दिक स्वागत है ।

sushma 'आहुति' said...

भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने...

Reena Maurya said...

बेहद सुन्दर रचना...
:-)

Ashu Agarwal said...

बहुत सुंदर रचना है
जिंदगी शाम है
मैं सुना तट
और तुम समंदर
बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ हैं
आपकी अन्य कविताये "शब्द संवाद" में पढीं सभी कविताये दिल को छू गयी

मदन मोहन सक्सेना said...

सुन्दर ,सरल और प्रभाबशाली रचना। बधाई।
कभी यहाँ भी पधारें।
सादर मदन

http://saxenamadanmohan1969.blogspot.in/
http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

कविता रावत said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
नवरात्रि की शुभकामनाएँ!

कविता रावत said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति !
नवरात्रि की शुभकामनाएँ!