Thursday, September 19, 2013

एक बूंद का दामन.....


बूंदों को तुम सहेजो
मि‍लो नदी में...
बन जाओ समुद़ की उ़दात लहरें
मैं दे दूंगी तुमको
संचित एक बूंद जीवन की
और बन जाउंगी
सूखा रेगि‍स्‍तान
कि‍( जब
हममें कोई मेल नहीं
क्‍यों पकड़ें एक बूंद का दामन.......


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कि‍स बात पे हैरां हो तुम
कि‍स बात पे है ये खामोशी
मतलब पड़ने पर ही दुनि‍यां
 कि‍या करती है कदमब़ोसी 

8 comments:

ANULATA RAJ NAIR said...

बहुत सुन्दर भाव......

अनु

Darshan jangra said...

सुन्दर भाव......

Anonymous said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल आज की चर्चा : दिशाओं की खिड़की खुली -- हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : चर्चा अंक :006

ललित वाणी पर : जिंदगी की नई शुरूवात

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण...

ब्लॉग बुलेटिन said...

आज की ब्लॉग बुलेटिन चुप रहनें के फ़ायदे... ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ...

सादर आभार !

Yashwant Mathur said...

कल 21/09/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

sushma verma said...

बेहतरीन अभिवयक्ति.....

Sarik Khan Filmcritic said...

बहुत बेहतरीन