Tuesday, September 17, 2013

कीमती कि‍ताब से....


 कोई सफ़ा भी नहीं
 पलट कर देखता है
 एक  बार मगर
 करीने से सजा कर हमें
 रखता है कमरे में
 इंतजार में उनके
 गर्द का पैरहन पहन
 इन दि‍नों हम भी हो गए हैं
 एक कीमती कि‍ताब से....

*******************************

 एक लम्हे की चाह में गुजर जाएगी तमाम उम्र
 कि अब प्रेम मेरी आँखों से नीर बन बहता है...

*************************
जिंदगी और रात बीत चुकी आधी-आधी
कुरेदो एक नया जख्म कि सिलसिला बरकरार रहे...

15 comments:

Satish Saxena said...

कमाल की अभिव्यक्ति...
बधाई !

अनुपमा पाठक said...

जिंदगी और रात बीत चुकी आधी-आधी
***
और आधी-आधी बातों को पिरो कर एक सम्पूर्ण अभिव्यक्ति!
बधाई!

राजीव कुमार झा said...

आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल {बृहस्पतिवार} 19/09/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" पर.
आप भी पधारें, सादर ....राजीव कुमार झा

Amit Chandra said...

जिंदगी और रात बीत चुकी आधी-आधी
कुरेदो एक नया जख्म कि सिलसिला बरकरार रहे...

waah.... kya baat hai.

dr.mahendrag said...

जिंदगी और रात बीत चुकी आधी-आधी
कुरेदो एक नया जख्म कि सिलसिला बरकरार रहे...
बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति.
परन्तु आशावादी बन गुस्ताखी से कहना चाहूँगा रश्मिजी,
बहुत गम है जख्म देने को,बहुत रात बाकी है नयी सुबह होने को,
बहुत लोग हैं दुनिया में दूजो के जख्म कुरेदने को,क्यों न सिलसिला शुरू करें उनके मिटाने को.

dilbag virk said...

आपकी यह प्रस्तुति 19-09-2013 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत है
कृपया पधारें
धन्यवाद

HARSHVARDHAN said...

आज की विशेष बुलेटिन "रहीम" का आँगन, राम की "तुलसी" और ब्लॉग बुलेटिन में आपकी इस पोस्ट को भी शामिल किया गया है। सादर .... आभार।।

Anonymous said...

बेहतरीन प्रस्तुति

downloading sites के प्रीमियम अकाउंट के यूजर नाम और पासवर्ड

poonam said...

bahut khub

HARSHVARDHAN said...

सुन्दर रचना के लिए आपका सहर्ष आभार। सादर।।

नई कड़ियाँ : मकबूल फ़िदा हुसैन

राष्ट्रभाषा हिंदी : विचार और विमर्श

HARSHVARDHAN said...

सुन्दर रचना के लिए आपका सहर्ष आभार। सादर।।

नई कड़ियाँ : मकबूल फ़िदा हुसैन

राष्ट्रभाषा हिंदी : विचार और विमर्श

ANULATA RAJ NAIR said...

वाह....
बहुत बढ़िया.....

अनु

Darshan jangra said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - शुक्रवार - 20/09/2013 को
अमर शहीद मदनलाल ढींगरा जी की १३० वीं जयंती - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः20 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra





sushma verma said...

बेहतरीन अभिवयक्ति.....

sushma verma said...

बेहतरीन अभिवयक्ति.....