Saturday, September 29, 2012

याद आई है....

चांद ने अपनी चांदनी बि‍खराई है
मुझको फि‍र आपकी याद आई है ।

इंतजार का यही सि‍ला मि‍ला मुझे
कि‍ वक्‍त ने फि‍र दुश्‍मनी नि‍भाई है।।



कैसे न उठेगा आपके भी दि‍ल में दर्द
कि फि‍र आंख मेरी भर आई है।

चलो सुकून तो इतना है मुझको
कि आपने वफा ही नि‍भाई है ।।

10 comments:

yashoda agrawal said...

आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 03/10/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

Anupama Tripathi said...

बहुत सुंदर एवं कोमल अभिव्यक्ति ....

"अनंत" अरुन शर्मा said...

वाह क्या बात है एक एक शब्द शानदार है बहुत खूब उम्दा रचना, बहुत-२ बधाई रश्मि जी

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (30-09-2012) के चर्चा मंच पर भी की गई है!
सूचनार्थ!

Dheerendra singh Bhadauriya said...

चलो सुकून तो इतना है मुझको
कि आपने वफा ही नि‍भाई है,,,

वाह,,बहुत सुंदर पंक्तियाँ,,,,
RECENT POST : गीत,

expression said...

बहुत बहुत सुन्दर......
आपके ब्लॉग की चर्चा कुछ दिन पूर्व दैनिकभास्कर में भी थी.
बधाई
अनु

सुशील said...

इधर की आँख में आँसू ले आना
उधर के दिल में दर्द उठवाना
बेतार के तारों का एक ये भी
तो है सुंदर सा अफसाना !!

काव्य संसार said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति |
इस समूहिक ब्लॉग में पधारें और इस से जुड़ें |
काव्य का संसार

Vinay Prajapati said...

very very nice :)

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अपनी रचनाओं का कॉपीराइट मुफ़्त पाइए

उपासना सियाग said...

बहुत सुन्दर