Monday, June 25, 2012

रूके कदम....

उस मोड़ पर
जहां ठहरकर
हम दो
वि‍परि‍त ध्रुव की तरफ
मुड़ने ही वाले थे...
एक दूसरे को
अलवि‍दा
कहने से पहले
एक बार फि‍र से
भरपूर
मगर डबडबाई आंखों से
देखना चाहा हमने
तभी
वेगवान
आंसुओं के प्रवाह ने
तोड़ दी अपनी हदें
.....बरस पड़ी
और
वि‍दा के लि‍ए
उठे दो हाथ
अचानक आबद्ध हो उठे
सारी दूरि‍यों को तज
एक-दूजे में जा सि‍मटे....

15 comments:

Dr.NISHA MAHARANA said...

waah komal ahsas bhari prastuti...dil khush ho gaya...

अजय कुमार झा said...

बहुत ही सुंदर रचना रश्मि दी \ भावपूर्ण और ठिठका देने वाली ।

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार २६/६ १२ को राजेश कुमारी द्वारा
चर्चामंच पर की जायेगी

M VERMA said...

निर्बाध आबद्धता मिले
बहुत खूबसूरत रचना

अजय कुमार झा said...

आपकी पोस्ट को हमने आज की पोस्ट चर्चा का एक हिस्सा बनाया है , कुछ आपकी पढी , कुछ अपनी कही , पाठकों तक इसे पहुंचाने का ये एक प्रयास भर है , आइए आप भी देखिए और पहुंचिए कुछ और खूबसूरत पोस्टों तक , टिप्पणी पर क्लिक करें और देखें

Alok verma said...

बहुत बढ़िया कमेन्ट
फेसबुक पर यूट्यूब की विडियो कैसे पोस्ट करें?

dheerendra said...

मन को प्रभावित करती सुंदर रचना,,,,,

RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: आश्वासन,,,,,

ana said...

sundar wa bhawpoorna prastuti

Sunil Kumar said...

भावपूर्ण रचना आभार

कमल कुमार सिंह (नारद ) said...

बहुत सुन्दर

कमल कुमार सिंह (नारद ) said...

बहुत सुन्दर

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

वाह! क्या ही खुबसूरत रचना...
सादर.

lokendra singh rajput said...

बेहद खूबसूरत रचना...

amrendra "amar" said...

अनुपम भाव ... बेहतरीन प्रस्‍तुति।

sheen said...

marvelous.....