Friday, February 22, 2008

आकाशबेल

मेरे सपने
आकाशबेल की तरह लंबे क्यों होते हैं
जबकि‍ हकीकत में मेरे बौने हाथ
सपनों के घुटने तक को
छू नहीं पाते
फि‍र मेरे सपनों को उस उंचाई तक
जाने-नापने का क्या हक है.........

1 comment:

mehek said...

bahut khubsurati se apne bhavon ka pradhrashan kiya hai,sawal sahi hai,sapne aakashbel ki tarah lambe kyun hote hai,jab pana itna mushkil hota hai.
http://mehhekk.wordpress.com/