Wednesday, January 12, 2022

सांझ का चंदोवा



सांझ का चंदोवा तना है
रक्तांबर आकाश में 
डूबता जा रहा सूरज ...
रत्ती सी पत्ती मुस्काती है
हौले - हौले
स्मृतियों की किवाड़ खुलने को है ...

3 comments:

Ravindra Singh Yadav said...

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 13 जनवरी 2022 को लिंक की जाएगी ....

http://halchalwith5links.blogspot.in
पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

!

विश्वमोहन said...

वाह!
शनै:-शनै: खोलती है संध्या अब अर्गला
फिर सजेगी निशा की नई चित्रकला।

रेणु said...

छोटी-सी पर बहुत ही प्रभावी रचना। हार्दिक शुभकामनाएं रश्मि जी 🙏🙏🌷🌷❤️❤️