Saturday, September 18, 2021

भीगा मन...


 नदी

बहा ले जाती है

सारा अवसाद

एक स्‍पर्श से उत्‍फुल्‍ल

हो जाता है तन,

नदी के पास 

भी होता है 

हमारी तरह 

भीगा मन....। 

5 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

वाह

Onkar said...

बहुत सुन्दर

आलोक सिन्हा said...

बहुत सुन्दर

कविता रावत said...

सच आखिर कब तक मानवीय गन्दगी का बोझ लादे रखेगी नदी

बहुत सुन्दर

Zee Talwara said...

वाह बड़ी सूंदर लाइने लिखी है आपने। इसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।  Zee Talwara