Tuesday, February 28, 2017

पलाश


सारे जंगल में खि‍ला है पलाश
ये स्‍मरण है तुम्‍हारा ही
बैंजनी आकाश, और
सूखे पत्‍तों में गि‍रा, दहकता पलाश 

3 comments:

kuldeep thakur said...

दिनांक 02/03/2017 को...
आप की रचना का लिंक होगा...
पांच लिंकों का आनंदhttps://www.halchalwith5links.blogspot.com पर...
आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...
आप की प्रतीक्षा रहेगी...

रश्मि शर्मा said...

Dhnyawad

VIJAY KUMAR VERMA said...

वाह
बहुत सुन्दर