Wednesday, December 3, 2014

मुरझा जाते हैं....


आओ
मि‍ल जाओ
साथ रहें कुछ दि‍न, कुछ बरस
और
जुदा हो जाओ
फि‍र कभी न मि‍लें हम
कुछ रि‍श्‍ते
बहुत करीब होने पर
खो जाते हैं, मुरझा जाते हैं....



तस्‍वीर....छुईमुई की शरमाई पत्‍ति‍यों के बीच खि‍ला फूल 

4 comments:

Dilbag Virk said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 4-12-2014 को चर्चा मंच पर गैरजिम्मेदार मीडिया { चर्चा - 1817 } में दिया गया है
धन्यवाद

Mukesh Kumar Sinha said...

बहुत सुन्दर

dr.mahendrag said...

रिश्ते कब खत्म हुए हैं ,फर्क उन्हें निभाहने में आ जाता है , बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

Lekhika 'Pari M Shlok' said...

bahut sunder rachna kuch rishtey aise hi hote hai taazaaa hamesha