Monday, December 9, 2013

पहले नील आर्मस्‍ट्रांग..

नील......

जब से हम
पड़े हैं प्‍यार में
तुमने मुझे चांद समझा
और मैंने तुम्‍हें समंदर

हम दूर हैं
ये हमारी कि‍स्‍मत है
मैं खुद को तुममें
वि‍लीन करना चाहती हूं
तुम प्रेम की
चांदनी तले
उम्र गुजारना चाहते हो

और अब
जागी है तुममें ये
अनोखी ख्‍वाहि‍श
कि तुम ही बनो
इस चांद को छूने वाले
पहले नील आर्मस्‍ट्रांग......

तस्‍वीर मेरे कैमरे की...

4 comments:

हरकीरत ' हीर' said...

bahut umda.....

Prasanna Badan Chaturvedi said...

वाह... उम्दा भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

नयी पोस्ट@ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी

वसुंधरा पाण्डेय said...

बहुत ही सुन्दर !

वसुंधरा पाण्डेय said...

बहुत बढियां..