Wednesday, November 6, 2013

शाम और एक प्‍याली चाय...


हल्‍की ठि‍ठुरन
शाम की गंध
और एक प्‍याली 
चाय की तलब
चलो
आज तुम ही बना लो
एक प्‍याली चाय

मैं तुम्‍हारी
पीठ से सट,आंखें मूंद
महसूस करूंगी
चीनी-पत्‍ती के साथ
प्रेम मि‍लकर
बनते चाय की गंध
कैसी होती है
और
कैसा होता है
ऐसी चाय का स्‍वाद....


तस्‍वीर--साभार गूगल

9 comments:

lori ali said...

pyari chay.....pyara swaad :)
mai bjaau, chaay pi lu!

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बृहस्पतिवार (07-11-2013) को  "दिमाग का फ्यूज़"  (चर्चा मंच 1422)      पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रविकर said...

बढ़िया प्रस्तुति-
आभार महोदया-

sushma 'आहुति' said...

खुबसूरत प्रस्तुती....

dr.mahendrag said...

मैं तुम्‍हारी
पीठ से सट,आंखें मूंद
महसूस करूंगी
चीनी-पत्‍ती के साथ
प्रेम मि‍लकर
बनते चाय की गंध
कैसी होती है
और
कैसा होता है
ऐसी चाय का स्‍वाद....

सुन्दर अहसास ,खूबसूरत कल्पना,मन भी कहाँ कहाँ कि उड़ान भर लेता है

Yashwant Yash said...

कल 08/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

बहुत सुंदर रचना |

Bhavana Lalwani said...

simple yet lovely!!!!!

Digamber Naswa said...

चाय और उनकी गंध ...
दिल से दिल का एहसास ...