Saturday, October 12, 2013

आने वाला तूफान 'फैलि‍न'


आने वाले तूफान 'फैलि‍न' के अंदेशे से 
हलकान हो रहा है दि‍ल मगर
कुछ नहीं होगा, खुद से ये कहती हूं

घबराई सी शाम में हवाओं को
तुम्‍हारे घर का पता देकर
राह के कंकड़ पलकों से चुनती हूं

घने अंधेरे और तेज हवाओं के बीच
कि‍सी गरीब की छत न उड़े
बार-बार उस रब से दुआ करती हूं

हर झंझवात और बेतरह दर्द के साए में
लि‍पटे अपने रि‍श्‍ते के दिये को
आंचल की ओट से ढकती हूं

मन का अंधि‍यारा घना होने पर
तुम्‍हारी आवाज के रेशे चुन
सांसों की डोर से ख्‍़वाबों के घोसलें बुनती हूं....


तस्‍वीर--साभार गूगल 

7 comments:

Darshan jangra said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - रविवार - 13/10/2013 को किसानी को बलिदान करने की एक शासकीय साजिश.... - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः34 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


Neeraj Kumar said...

बहुत सार्थक एवं सुंदर

Onkar said...

वाह, बहुत सुन्दर

Yashwant Yash said...

तूफान हमारे जीवन का ही हिस्सा हैं।

आपको सपरिवार विजय दशमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ।

सादर

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : रावण जलता नहीं
विजयादशमी की शुभकामनाएँ .

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : रावण जलता नहीं
विजयादशमी की शुभकामनाएँ .

वसुंधरा पाण्डेय said...

बहुत सुन्दर !