Saturday, August 17, 2013

मैं रीत गई, हो गई खाली.....


भरे-भरे थे तुम
और मैं एकदम खाली
जैसे रेतघड़ी हों हम
तुम्‍हें भरकर
मैं रीत गई, हो गई खाली

अब मैं इंतजार में हूं
वक्‍त के पलटने का
जब तुम रीतने लगोगे
और मैं भरती जाउंगी

काश..हमें रोकना आता
उस दम वक्‍त को
जब तुम और मैं
आधे-आधे भरे से होते
आधे-आधे खाली
साझा सुख-दुख साथ लि‍ए......


तस्‍वीर--साभार गूगल

14 comments:

Darshan jangra said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. हिंदी ब्लॉग समूह के शुभारंभ पर आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट को हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल किया गया है और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा {सोमवार} (19-08-2013) को हिंदी ब्लॉग समूह
पर की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra



Darshan jangra said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. हिंदी ब्लॉग समूह के शुभारंभ पर आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट को हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल किया गया है और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा {सोमवार} (19-08-2013) को हिंदी ब्लॉग समूह
पर की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra



Darshan jangra said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. हिंदी ब्लॉग समूह के शुभारंभ पर आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट को हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल किया गया है और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा {सोमवार} (19-08-2013) को हिंदी ब्लॉग समूह
पर की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra



ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही सुंदर रचना.

रामराम.

शिवनाथ कुमार said...

हर पल का सुख-दुःख आधा आधा बँट जाए तो कितना बढ़िया

Onkar said...

बहुत सुन्दर रचना

sushma 'आहुति' said...

भावो को संजोये रचना.....

राजेंद्र कुमार said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति आज रविवार (18-08-2013) को "ब्लॉग प्रसारण- 89" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

Swati Vallabha Raj said...

सुन्दर....

Yashwant Mathur said...

आज 19/008/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक है http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

रेतघड़ी का सुंदर बिम्ब ....

ज्योति-कलश said...

सुन्दर अभिव्यक्ति ...

Mukesh Kumar Sinha said...

khubsurat sa bhai... sangeeta di ne sahi kaha ek dum naya bimb :)

sadhana vaid said...

बहुत सुंदर रूपक रश्मि जी ! बहुत मासूम सी अभिलाषा ! बहुत ही खूबसूरत भावपूर्ण रचना !