Thursday, April 18, 2013

कि ढल गया सूरज.....


अब भी खड़ी हूं अलकनंदा के तट पर
इंतजार में
कि ढल गया सूरज, तो क्‍या
मुरझा गए हाथों के फूल 
तो क्‍या
कि‍या था तुमने वादा
शाम का
कि सूरज जब हो उतावला
जाएगा संध्‍या से मि‍लने
मैं भी उतनी ही बेताबी से
आउंगा तुमसे मि‍लने
बस वहीं करना तुम मेरा इंतजार

अब तो ढल गई शाम, बताओ न
कहां हो तुम.....


तस्‍वीर--साभार गूगल

15 comments:

anand murthy said...

ati uttam...................kavita

aagrh h ki ... isme bhi shamil ho....

http://anandkriti007.blogspot.com

Reena Maurya said...

अति सुन्दर दिल को छू लेनेवाली रचना..
:-)

Brijesh Singh said...

बहुत सुन्दर। बधाई!

DR. PAWAN K. MISHRA said...

intazaar kaa bahut sundar chitran. waise intazaar ka bhe apna ek anand hotaa hai jo milne par samapt ho jata hai..
bahut hi sundar rachna

रविकर said...

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवारीय चर्चा मंच पर ।।

Aziz Jaunpuri said...

wah wah, talash jari rakhiye, bhawnao ko khoobshurat shabdon me piro diya ahi

Aditi Poonam said...

सुंदर रचना रश्मि जी....
इंतज़ार का अपना मज़ा होता है....

Vinay Prajapati said...

बेहतरीन रचना

Pratibha Verma said...

बहुत सुन्दर....बेहतरीन प्रस्तुति !!
पधारें बेटियाँ ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

इंतज़ार के पल कटते नहीं ..... बेहतरीन रचना

Aziz Jaunpuri said...

सुन्दर दिल को छू लेनेवाली रचना.

Aparna Bose said...

bahut sundar ...aapko fb par request bhejne ki koshish ki thi par aapki privacy settings relatives aur close friends ke alava kisi ko allow nahin karti hai.aap apni ore se request bhej dijiyega
maine kuch nayin rachnayen post ki hain.please padh kar apni pratikriya post karen.
regards
http://boseaparna.blogspot.in/

Aziz Jaunpuri said...

बहुत सुन्दर , बेहतरीन रचना

Suresh Agarwal Adhir said...

Atti uttam .. wahh

सरिता भाटिया said...

खुबसूरत रचना
तेरे मन में राम [श्री अनूप जलोटा ]