Wednesday, March 6, 2013

तेरा भी शुकराना....

तमाम रि‍श्‍ते-नाते
बेशकीमती हैं तुम्‍हारे लि‍ए
सि‍वा एक मेरे

* * *
फरेब से बारि‍श के
मुरझाते हैं नन्‍हें तरू
पर आ ही जाता है उन्‍हें भी
धरती के सीने से
जीवन शक्‍ति लेना

* * * *
कि एक ठोकर देती है
आगे संभलकर चलने का
हौसला

* * *
नए सब़क और पहली ठोकर के लि‍ए

जिंदगी के साथ तेरा भी शुकराना....

18 comments:

संतोष त्रिवेदी said...

....मेरा भी शुकराना :)

MANU PRAKASH TYAGI said...

जन्नत 2 के गाने के बोल याद आ गये इस रचना को पढकर

Virendra Kumar Sharma said...

रूपकात्मक तत्वों से संसिक्त सशक्त रचना .प्रतीक अभिनव लिए हैं .सुन्दर मनोहर .

Yashwant Mathur said...


दिनांक 07/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
धन्यवाद!

Yashwant Mathur said...


दिनांक 07/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
धन्यवाद!

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

खाई हो चोट तो दुख औरों का समझे,
वो हँस रहे है और यहाँ जा पे बन आई,
Recent post: रंग,

dr. ashok priyaranjan said...

bahut achchi kavita hai.

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

कि एक ठोकर देती है
आगे संभलकर चलने का
हौसला

उम्दा !

Rajendra Kumar said...

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,आभार.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल गुरूवार (07-03-2013) के “कम्प्यूटर आज बीमार हो गया” (चर्चा मंच-1176) पर भी होगी!
सूचनार्थ.. सादर!

dr.mahendrag said...

नए सब़क और पहली ठोकर के लि‍ए
जिंदगी के साथ तेरा भी शुकराना...
बहुत अच्छी प्रस्तुति ..............पर मैं अरज करना चाहूँगा ...........
उन्हें नहीं पता है गम ऐ जुदाई का
आज वे चिलमन से हमें देखतें हैं.
खायेंगे चोट जब कभी अपने दिल पर
जानेंगे कैसे दिल टूटते हैं.

dr.mahendrag said...

नए सब़क और पहली ठोकर के लि‍ए
जिंदगी के साथ तेरा भी शुकराना...
बहुत अच्छी प्रस्तुति ..............पर मैं अरज करना चाहूँगा ...........
उन्हें नहीं पता है गम ऐ जुदाई का
आज वे चिलमन से हमें देखतें हैं.
खायेंगे चोट जब कभी अपने दिल पर
जानेंगे कैसे दिल टूटते हैं.

तुषार राज रस्तोगी said...

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति आज के ब्लॉग बुलेटिन पर |

Aziz Jaunpuri said...

sundar pratikatmk aur rupatmk prastuti

रश्मि शर्मा said...

Bahut khoob

दिनेश पारीक said...

बहुत खूब आपके भावो का एक दम सटीक आकलन करती रचना
आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
तुम मुझ पर ऐतबार करो ।

Vikesh Badola said...

पीड़ापूर्ण सुन्‍दरता सहित।

दिगम्बर नासवा said...

नए सब़क और पहली ठोकर के लि‍ए
जिंदगी के साथ तेरा भी शुकराना....

अनायास इस गाने की याद आ गई .... मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया ...हर फ़िक्र को धुंए एँ उड़ाता चला गया ...