Thursday, January 10, 2013

फख्र से सीना तान कि‍ तू शहीद सि‍पाही का बच्‍चा है....

शहीद जवान सुधाकर सिंह के चार महीने के अबोध बच्‍चे भास्‍कर के नाम, जि‍सके पि‍ता का सर काटकर दगाबाज ले गए....

तू रोता क्‍यों है बच्‍चे
क्‍या हुआ जो तेरे सर से
साया उठ गया उस पि‍ता का
जो अभी चार महीने पहले ही
तुझे पाकर खुशी से बौराया था
सर कलम कर ले गए उसका
वही
पीठ पर जो हमेशा घोंपता है छुरा....

अब देश मातम मनाएगा
वि‍रोध में कैंडल जलाएगा
अहिंसा के पुजारी हैं कहकर
शांति वार्ता के लि‍ए हाथ बढ़ाएगा
और कुछ दि‍नों में सब भूल जाएगा....

तुझे नसीब होगी धूल भरी अभावों वाली जिंदगी
फि‍र भी.....
फख्र से सीना तान कि‍ तू शहीद सि‍पाही का बच्‍चा है।

दगाबाज..चालबाज है हमारा पड़ोसी
बार-बार इसने हमें खून के आंसू रूलाया है
फि‍र भी सि‍यासत वालों ने
सब भूल कदम आगे बढ़ाया है....

न जाने कि‍तने घर उजड़े
न जाने कि‍तनी मांग सूनी हुई
सबको मालूम है
सन 47 से 2013 तक
कि‍तने हुए आघात
हमने कि‍ए शांति के प्रयास
और उस 'पाक' का विश्‍वासघात

हर संसाधन से युक्‍त हम
बस
सरहद पर अपने वीर गवांते हैं
हर शहीद के शव के आगे
सर अपना झुकाते हैं
और देशभक्‍त कहलाते हैं....

ऐ मासूम...कल न पूछेगा कोई हाल तेरा
फि‍र भी.....
फख्र से सीना तान कि‍ तू शहीद सि‍पाही का बच्‍चा है।


12 comments:

Main Hoon Na .... said...

हर संसाधन से युक्‍त हम
बस
सरहद पर अपने वीर गवांते हैं
हर शहीद के शव के आगे
सर अपना झुकाते हैं
और देशभक्‍त कहलाते हैं....

हकीकत का सुन्दर शब्द चित्रण।

रविकर said...

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

प्रभावशाली ,
जारी रहें।

शुभकामना !!!

आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

सरहद पर अपने वीर गवांते हैं
हर शहीद के शव के आगे
सर अपना झुकाते हैं
और देशभक्‍त कहलाते हैं....

सच कहती सुंदर पंक्तियाँ,,,,
recent post : जन-जन का सहयोग चाहिए...

ब्लॉग बुलेटिन said...

अमन की आशा या अमन का तमाशा - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

milap singh said...

bhut aschi abhivyaki hai....bhut sunder

Sunil Kumar said...

सच्चाई से कही गयी बात .....

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

प्रभावशाली ,
जारी रहें।

शुभकामना !!!

आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

Asha Saxena said...

गहरे अहसास का बहुत ख़ूबसूरती से वर्णन किया है |
सच्चाई बयान करती रचना |
आशा

सदा said...

ऐ मासूम...कल न पूछेगा कोई हाल तेरा
फि‍र भी.....
फख्र से सीना तान कि‍ तू शहीद सि‍पाही का बच्‍चा है।
अक्षरश: सच कहा आपने ...

madhu singh said...

उत्कृष्ट प्रस्तुति सच कहा आपने

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

क्या बात
बहुत सुंदर