Sunday, October 7, 2012

आंसू के दो रंग...

1.बरसेंगे जो बादल आंसू छुपा लेंगे
तुमको न कभी ये अपना पता देंगे...
क्‍यों ढूंढते हो उदासी इस चेहरे पर
हम इस चेहरे पर नया चेहरा लगा देंगे....



2.बेशकीमती होते हैं आंसू
बेवजह यूं इन्‍हें आंखों से ढलकाया न करो
कोई याद जब मजबूर करे रोने के लि‍ए
सजा लो मुस्‍कान होंठों पे आंसू नुमाया न करो

8 comments:

"अनंत" अरुन शर्मा said...

वाह उम्दा लाजवाब प्रस्तुति

Aditi (Poonam) said...

1.बरसेंगे जो बादल आंसू छुपा लेंगे
तुमको न कभी ये अपना पता देंगे...

बहुत खूब

Dheerendra singh Bhadauriya said...

बहुत खूब रश्मी जी,,,,

नयनों के ये नीर तीर से बच के रहना
वरना फिर पछताओगे,रुलायेगें ये नैना,,,,

RECENT POST: तेरी फितरत के लोग,

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बहुत अच्छी रचना
बहुत सुंदर
क्या बात

देवेन्द्र पाण्डेय said...

:)

Shah Nawaz said...

वाह! ज़बरदस्त बात कह दी आपने!

इमरान अंसारी said...

बहुत ही सुन्दर लगी पोस्ट।

Akash Mishra said...

आपके लिखे दोनों काव्यांश बहुत सुन्दर लगे , लेकिन सबसे सुन्दर वो तस्वीर है , जिसका आपने यहाँ प्रयोग किया है |

सादर