Thursday, December 15, 2011

आस....

तोड़ देना दि‍ल मगर
न तोड़ना मेरा वि‍श्‍वास कभी
बदल जाओ गर बदलना है मगर
न तोड़ना मेरी आस कभी....

6 comments:

Ashok Jairath said...

कहाँ हैं आज कल
गगरी में ओशन
ऐसे कमाल करने वाली आप

खुश रहिये

वन्दना said...

बहुत सुन्दर भाव्।

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर" Dr.Rajendra Tela,Nirantar" said...

banaa rahe vishwaas
naa toote kabhee aas
duaa hamaaree hai
aapkee kalam se
nirantar nikalte rahein
sundar bhaav

संतोष कुमार said...

बहुत सुंदर!

आभार !!

अरूण साथी said...

साधु-साधु

Reena Maurya said...

khubsurat rachana....