Saturday, November 26, 2011

करो वादा....

करो वादा अब दि‍ल पर हाथ रख के
यूं तन्‍हा शामों की
सौगात अब न दोगे....
रखोगे मुझे
सीने में छुपाकर
रोना पड़े जि‍से सोचकर
मुझको कभी, ऐसे
ख्‍यालात अब न दोगे...
तेरी कमी सताए
हम राह तके और
कोई नजर न आए
जो आंखों ही आंखों में काटनी पड़े
वैसी रात अब न दोगे
लाख छुपाने से भी
छुपता नहीं हाल-ए-दि‍ल
जमाने को हो जाए खबर
करो वादा ऐसे
हालात अब न दोगे......।

15 comments:

Udan Tashtari said...

क्या बात है....

अनुराग अन्वेषी said...

वादा रहा :-) अच्छी और प्यारी कविता।

वन्दना said...

सुन्दर भाव

vibha said...

behad sundar....isse acca kuch nahi ho sakta

Ratan Singh Shekhawat said...

बहुत बढ़िया रचना

"जाटदेवता" संदीप पवाँर said...

बेहतरीन लिखा है, अच्छे शब्द, दिल की बात कलम से

बारिशें said...

हर बार की तरह इस बार भी वही खूबसूरती ... वही आवेग ... और वही बहाव ...एक अधूरेपन की अनबूझी कहानी ... शिलाओं के भीतर से आती रौशनी ... लिखती रहिये ... प्यार और आशीर्वाद

Sunil Kumar said...

वादों पर ज़िंदगी नहीं कटती .....

Amit Chandra said...

सुदर एहसास. आभार.

Reena Maurya said...

komal bhav sundar rachana

कौशल किशोर said...

जो आंखों ही आंखों में काटनी पड़े
वैसी रात अब न दोगे

बहुत सुन्दर....

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

आज 12/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (सुनीता शानू जी की प्रस्तुति में) लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

वाह! बहुत सुन्दर....

sushma 'आहुति' said...

बेहतरीन अंदाज़..... सुन्दर
अभिव्यक्ति........

बबीता वाधवानी said...

sunder rachna