Thursday, March 30, 2017

''सरहुल'' की बधाई






'' एला रे सारजम बा
एला रे हाड़ा गुन में
एला रे खुडा़ सांगि‍न 
एला रे नसो रेन में ''
..................................
'' आओ सखुआ के फूल
आओ उतर आओ
आाओ नई-नई कोंपले
आओ उतर आओ ''

प्रकृति‍ पर्व ''सरहुल'' की बधाई सभी को । दो पंक्‍ति‍यां पहले मुंडारी में, फि‍र उसका हि‍ंदी अनुवाद पढ़ें।

8 comments:

mahendra verma said...

‘सरहुल’ का सुंदर आवाहन ।
बधाई ।

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 31 मार्च 2017 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

HARSHVARDHAN said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन और देविका रानी में शामिल किया गया है।कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

Dhruv Singh said...

बहुत ख़ूब !

सुशील कुमार जोशी said...

सुन्दर।

savan kumar said...

सुन्दर शब्द रचना

Onkar said...

बहुत बढ़िया

Digamber Naswa said...

वाह ... मौसम अनुरूप उतर आने का आह्वान ... काव्य चित्र ...