Wednesday, December 24, 2014

बड़े दि‍न की बधाई



' मेरे घर के आंगन में आकर सुस्‍ताया था शाम सूरज
कहा-कल 'बड़ा दि‍न' है, बहुत देर तक चलना होगा ''

5 comments:

इंतज़ार said...

खूबसूरत अभिव्यक्ती ....

राजेंद्र कुमार said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (26.12.2014) को "जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि" (चर्चा अंक-1839)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : वह उपहार देने स्वर्ग से आता है

Digamber Naswa said...

बहुत ही खूब ... शब्दों को सार्थक करते भाव ...

Pratibha Verma said...

बढिया पोस्ट!!!