Friday, March 7, 2014

सवाल.... महि‍ला दि‍वस पर


अब सवाल
क्षु्द्धा तृप्‍ति‍ के लि‍ए
दो मुट्ठी चावल
के जुगाड़ का नहीं रहा
न ही
आंखों के नीचे
काले-गहराते
सौंदर्यहीन बनाते
घेरों को हटाने का है.....

अब सवाल
'स्‍व' की पहचान का
नि‍रंतर कुचलते
आत्‍मसम्‍मान का है
जो औरत को
जाति‍ वि‍शेष की संज्ञा से
अलग कर
एक मनुष्‍य के रूप में
परि‍भाषि‍त करे ...

अब सवाल
स्‍त्री अधि‍कार का है
उनसे हो रहे
व्‍यवहार का है
औरतें अब
सुंदरता की प्रशंसा नहीं चाहतीं
वो चाहती हैं
स्‍वतंत्र रहना , भरपूर जीना
सम्‍मान पाना
और हर औरत की आंख में
औरत रूप पाने की खुशी देखना......

तस्‍वीर...साभार गूगल


4 comments:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

महिला दिवस पर बहुत सुंदर सृजन...!

RECENT POST - पुरानी होली.

प्रतिभा सक्सेना said...

यही सच है.

संजय भास्‍कर said...

उत्कृष्ट ....मन को ऊर्जा देते भाव.....

parmeshwari choudhary said...

Nice.