Thursday, October 17, 2013

तेरे साथ रहेगी मेरी ये वफ़ा....




उम्र भर तेरे साथ रहेगी
मेरी ये वफ़ा
हमसफ़र न बन सके
तो क्‍या हुआ
तेरी यादों को
सीने से लगाए
कट ही जाएगी ये जिंदगी
सि‍वा तेरे कि‍सी और के
न हो सके
तो क्‍या हुआ.......

7 comments:

yashoda agrawal said...

आपकी लिखी रचना मुझे बहुत अच्छी लगी .........
शनिवार 19/10/2013 को
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
में आपकी प्रतीक्षा करूँगी.... आइएगा न....
धन्यवाद!

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : लुंगगोम : रहस्यमयी तिब्बती साधना

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (18-10-2013) "मैं तो यूँ ही बुनता हूँ (चर्चा मंचःअंक-1402) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Upasna Siag said...


बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा शनिवार 19/10/2013 को प्यार और वक्त...( हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : 028 )
- पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर ....

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही खुबसूरत और प्यारी रचना..... भावो का सुन्दर समायोजन......

सारिक खान said...

Very nice

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

सुन्दर रचना |

मेरी नई रचना:- "झारखण्ड की सैर"