Saturday, March 2, 2013

तेरी आस........



धुआं-धुआं सी थी शाम
उजाले को नि‍गल गई कालि‍मा

अरमानों के दि‍ये को
ओट तो दे दो

कहीं बुझ न जाए तेरी आस
कि‍ बड़ी तेज हवा है......

तस्‍वीर--पंचघाघ के पास आज की शाम और नज़र मेरे कैमरे की..

7 comments:

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बहुत सुंदर रचना

क्या कहने



नोट: अगर आपको रेल बजट की बारीकियां समझनी है तो देखिए आधा सच पर लिंक...
http://aadhasachonline.blogspot.in/2013/02/blog-post_27.html#comment-form

बजट पर मीडिया के रोल के बारे में आप TV स्टेशन पर जा सकते हैं।

http://tvstationlive.blogspot.in/2013/03/blog-post.html?showComment=1362207783000#c4364687746505473216

सुमन कपूर 'मीत' said...

bahut khoob...abhi abhi fb pe padhi..

शालिनी कौशिक said...

सुन्दर प्रस्तुति आभार छोटी मोटी मांगे न कर , अब राज्य इसे बनवाएँगे .” आप भी जानें हमारे संविधान के अनुसार कैग [विनोद राय] मुख्य निर्वाचन आयुक्त [टी.एन.शेषन] नहीं हो सकते

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत सुंदर रचना,,,,फोटो अच्छी लगी

RECENT POST: पिता.

रविकर said...

बढ़िया है आदरेया-
शुभकामनायें-

Blogvarta said...

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MANU PRAKASH TYAGI said...

सुहाने मौसम पर सुहानी लाइने