Wednesday, March 13, 2013

छोड़ दि‍या हमने भी ....

(((...TODAY IS NO SMOKING DAY...)))


चल....
आज अंति‍म बार
तेरी याद को
तेंदू पत्‍ते में भर
कस कर 
एक धागे से लपेट दूं

और
सुलगा के उसे
लगाउं एक लंबा सा कश....
फूंक दूं अपने सीने की
सारी जलन

जलती बीड़ी के सि‍रे को
और लहका कर
जल्‍द ख़त्‍म कर दूं सब

और
चीखकर कहूं दुनि‍या से
लो
छोड़ दि‍या हमने भी
कश ले-लेकर अपनी ही जिंदगी को पीना.....


तस्‍वीर---साभार गूगल

12 comments:

दिगम्बर नासवा said...

कमाल का बिम्ब ... उनकी यादों को काश के सहारे पी लेना ओर उतार लेना जिस्म में कोने कोने में ...
बहुत खूब ...

vandana gupta said...

वाह लाजवाब

Rajendra Kumar said...

बहुत ही सुन्दर भाव...

दिलबाग विर्क said...

आपकी प्रविष्टि कल के चर्चा मंच पर है
धन्यवाद

शिवनाथ कुमार said...

यादों का कश ..
बहुत खूब
सादर !

Brijesh Singh said...

बहुत सुन्दर! लाजवाब!

Vikesh Badola said...

धुंए में झोंक दिया दिल के अरमानों को तेरे लिए....विचित्र उद्गार।

ज्योति खरे said...

और
चीखकर कहूं दुनि‍या से
लो
छोड़ दि‍या हमने भी
कश ले-लेकर अपनी ही जिंदगी को पीना---
बहुत सुंदर जीवन की बात

मेरे ब्लॉग में सम्मलित हों
jyoti-khare.blogspot.in

Brijesh Singh said...

आपकी रचना निर्झर टाइम्स पर लिंक की गयी है। कृपया इसे देखें http://nirjhar-times.blogspot.com और अपने सुझाव दें।

प्रतिभा सक्सेना said...

प्रखर और चुभती अनुभूति जीवन्त बिंबों में !

Dr.NISHA MAHARANA said...

koshish to karna hi chahiye .....bahut badhiya ....

Laxmi Kant Sharma said...

चल....
आज अंति‍म बार
तेरी याद को
तेंदू पत्‍ते में भर
कस कर
एक धागे से लपेट दूं..मेरी बेहद पसंदीदा पंक्तियाँ !!