Sunday, February 17, 2013

छुप गया बसंत रंग धानी....



गरजता रहा बादल
बरसती रही बूंदे
रात भर

सुबह ने
ओढ ली मेरी
वाली उदासी

कैद में है अब
बेगुनाह बसंत
चल रही ठंडी हवा
सर्र...सर्र..सर्र

ये मौसम भी हुआ
पि‍या जैसा बेईमान
करेगा मनमानी

है सब तरफ
सफ़ेद धुंआं
कहां छुप गया बसंत रंग धानी......

तस्‍वीर--सुबह छत पर बारि‍श का मजा लेते अभिरुप

7 comments:

Onkar said...

सुन्दर रचना

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत उम्दा प्रस्तुति,,,

recent post: बसंती रंग छा गया

Anupama Tripathi said...

bahut sundar ....

रविकर said...

सुन्दर प्रस्तुति आदरेया -
शुभकामनायें ||

Yashwant Mathur said...

बेहतरीन


सादर

madhu singh said...

sundar

Aditi Poonam said...

बहुत सुंदर सटीक अभिव्यक्ति........
साभार