Thursday, February 21, 2013

मुझे शब्‍द दो....


मेरे लि‍ए यह बात
कोई मायने नहीं रखती
कि‍ मुझसे
क्‍या बातें करते हो तुम

मेरे लि‍ए
यह बेहद जरूरी है कि
मुझसे बात करो
मुझे शब्‍द दो...आवाज दो

यह अहसास हो कि
साथ-साथ चलता है कोई
भले ही
तुम पहाड़ से उस पार
और मैं तराई में

बस
प्रति‍ध्‍वनि‍त होती रहे
एक आवाज
अहसास
कि मेरे अल्‍फा़ज
असर करते हैं
कि सारा दर्द दि‍ल का
तुमसे जा कहते हैं........

तस्‍वीर--साभार गूगल

9 comments:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

अच्छा हुआ की दर्द ने चौकां दिया उसको
कुछ नीद आ रही थी शबे - इन्जार में...


Recent post: गरीबी रेखा की खोज

शालिनी कौशिक said...

बहुत सुन्दर भावनात्मक प्रस्तुति आभार सही आज़ादी की इनमे थोड़ी अक्ल भर दे . आप भी जानें हमारे संविधान के अनुसार कैग [विनोद राय] मुख्य निर्वाचन आयुक्त [टी.एन.शेषन] नहीं हो सकते

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

अच्छी रचना

poonam said...

यह अहसास हो कि
साथ-साथ चलता है कोई
भले ही
तुम पहाड़ से उस पार
और मैं तराई में..... खूब

रविकर said...

प्रभावी प्रस्तुति |
आभार आदरेया ||

Pratibha Verma said...

क्या बात है ...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

श्रीमती वन्दना गुप्ता जी आज कुछ व्यस्त है। इसलिए आज मेरी पसंद के लिंकों में आपका लिंक भी चर्चा मंच पर सम्मिलित किया जा रहा है।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (23-02-2013) के चर्चा मंच-1164 (आम आदमी कि व्यथा) पर भी होगी!
सूचनार्थ!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सुंदर प्रस्तुति ... बस शब्द साथ चलते रहें

Laxmi Kant Sharma said...

मेरे लि‍ए यह बात
कोई मायने नहीं रखती
कि‍ मुझसे
क्‍या बातें करते हो तुम

मेरे लि‍ए
यह बेहद जरूरी है कि
मुझसे बात करो
मुझे शब्‍द दो...आवाज दो