Thursday, January 17, 2013

सीप की तलाश में...


बहुत देर तक
पसीजी रही
हथेलि‍यां
तुम्‍हारे गर्म स्‍पर्श के
अहसास से....

थि‍रकती रही
एक बूंद
अधरों पर
लरजती रही
सीप की तलाश में...

11 comments:

रश्मि प्रभा... said...

............ bahut kuch

पूरण खण्डेलवाल said...

खूबसूरत !!

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बहुत सुंदर
क्या बात

Kailash Sharma said...

अद्भुत अभिव्यक्ति..

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

थि‍रकती रही
एक बूंद
अधरों पर
लरजती रही
सीप की तलाश में... भावमय सुंदर पंक्तियाँ,,

recent post: मातृभूमि,

रविकर said...

पूरी होवे रश्मि की, भगवन शीघ्र तलाश |
बांचे जो यह पंक्तियाँ, खोवे होश-हवाश |
खोवे होश-हवाश, गजब दीवानापन है |
भरे-पुरे अहसास, चलो स्वाति सावन है |
मिले बूंद को सीप, रहे ना बात अधूरी |
रविकर का यह तेज, बनाए मोती पूरी ||

रविकर said...

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

अरुन शर्मा "अनंत" said...

वाह क्या कहने गहरे भाव आपकी सोंच को नमन हार्दिक बधाई

vandana gupta said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (18-1-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!

vandana gupta said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (18-1-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!

vandana gupta said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (19-1-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!