रूप-अरूप

रूप का तिलिस्म जब अरूप का सामना करे, तो बेचैनियां बढ़ जाती हैं...

Friday, August 22, 2025

तस्वीर ...

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आप सोचेंगे इस तस्वीर में तो कुछ ख़ास नहीं… इससे बेहतरीन कई तस्वीरें हैं मेरे पास। मगर यह अनमोल है मेरे लिए। तस्वीर में जो मंदिर दिख रहा, उसस...
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Friday, August 1, 2025

‘सब तीरथ कर आई, जन्‍म की मैली चुनर‍िया...’

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जीवन में पहली बार महाकुंभ जाने को मौका म‍िला। इलाहाबाद जो अब प्रयागराज कहलाता है, उस स्‍टेशन से कई बार गुजरी, मगर कभी रुकी नहीं। हाँ, वहाँ क...
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Sunday, July 13, 2025

मधुमालती ...

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  पड़ोस में थोड़ी दूर पर एक छप्पर वाला घर था और सामने की तरफ़ मधुमालती की लतर फैली थी।शाम को उसकी भीनी खुशबू फैलती तो बड़ा ख़ुशनुमा एहसास हो...
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Wednesday, September 18, 2024

पुरानी तस्वीर...

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  कल से लगातार बारिश की झड़ी लगी है। कभी सावन के गाने याद आ रहे तो कभी बचपन की बरसात का एहसास हो रहा है। तब सावन - भादो ऐसे ही भीगा और मन खि...
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Friday, August 23, 2024

हमारे साझे का मौसम

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उस बारिश से इस बारिश तक  न जाने कितनी बरसातें गुजर गई यह हमारे साझे का मौसम है  हवा ,  बादल ,  मोगरे ,  रातरानी सब तो हैं , टूटकर बरसता है आ...
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Saturday, August 10, 2024

बारि‍श का इंतजार...

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कोई मुझसे पूछे कि क्यों होता है बारिश का इंतजार तो मैं एक नहीं, सैकड़ों कारण गिनवा सकती हूं। अव्वल तो मुझे  बारिश की बूंदों को देखना, बारिश ...
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Wednesday, August 7, 2024

बरसती बूंदों का राग

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  केले के उन हरे सघन पत्तों पर  अनवरत बरसती बूंदों का राग है हर बरस इस मौसम में बस एक ही बात सोचती हूं क्या कोई होगा जो मेरी तरह यूं ही बारि...
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Saturday, August 3, 2024

बारिश की आवाजें

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  रात के अंधेरे में हो रही बारिश की आवाजें हैं! अभी एक और आवाज की स्मृति शामिल है इसमें  दूर फैले पहाड़ों पर होती हुई बारिश देखने  दो और आँख...
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Thursday, July 11, 2024

वाणभट्ट की आत्मकथा बनाम गाँव की व्यथा

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अपनी  छोटी सी लाइब्रेरी में एक किताब ढूंढ़ रही थी कि अचानक नजर पड़ी एक पीली सी , फटी जिल्दवाली किताब पर। जैसे कितने दिन से बीमार पड़ी हो और ...
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Tuesday, July 2, 2024

पिता की चिंता ...

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हममें बहुत बात नहीं होती थी उन दिनों जब मैं बड़ी होने लगी दूरी और बढ़ने लगी हमारे दरमियां जब मां मेरे सामने उनकी जुबान बोलने लगी थीं चटख रंग...
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रश्मि शर्मा
एक अनचीन्‍हा खालीपन, जि‍से भरने की कोशि‍श जब भी की मैंने...कि‍सी कवि‍ता ने आकार लि‍या..खुद की तलाश जारी है..जि‍स दि‍न खुद से मि‍लूंगी..मुकम्‍मल हो जाउंगी...
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