बहुत सुंदर अभिव्यक्ति। सादर। ------ नमस्ते, आपकी लिखी रचना शनिवार १३ दिसम्बर २०२५ के लिए साझा की गयी है पांच लिंकों का आनंद पर... आप भी सादर आमंत्रित हैं। सादर धन्यवाद।
यह रचना मुझे थोड़ा और भीतर तक ले गई। आपने उस एक पल की बात की है, जो अचानक सामने आकर हमें रोक देता है। मुझे अच्छा लगा कि आप याद को पकड़ने की कोशिश नहीं करतीं, बस उसे देखती हो। तेज हवा और पन्ना पलटने का रूपक बहुत सटीक बैठता है। यहाँ कोई शिकवा नहीं है, बस स्वीकार है।
सुंदर
ReplyDeleteबहुत सुंदर अभिव्यक्ति।
ReplyDeleteसादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शनिवार १३ दिसम्बर २०२५ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
बेह्तरीन भाव
ReplyDeleteसुन्दर
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteयह रचना मुझे थोड़ा और भीतर तक ले गई। आपने उस एक पल की बात की है, जो अचानक सामने आकर हमें रोक देता है। मुझे अच्छा लगा कि आप याद को पकड़ने की कोशिश नहीं करतीं, बस उसे देखती हो। तेज हवा और पन्ना पलटने का रूपक बहुत सटीक बैठता है। यहाँ कोई शिकवा नहीं है, बस स्वीकार है।
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