Wednesday, March 9, 2016

तुम ही दि‍खते हो......



आंखों में उतरे हो,
होठों में सि‍मटे हो
देखना हो खुद को
मुझमें देख लि‍या करो
चेहरे की हर रेखाओं में
अब तुम ही दि‍खते हो.......

1 comment:

  1. आपने लिखा...
    कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 11/03/2016 को पांच लिंकों का आनंद के
    अंक 238 पर लिंक की गयी है.... आप भी आयेगा.... प्रस्तुति पर टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।

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