Wednesday, April 15, 2015

मैं दरि‍या का पानी...


पढ़ तो लूं हर्फ तेरे
मि‍टाने से पहले
देख लूं फि‍र एक बार
तुझको
दूर
जाने से पहले

प्‍यार होता नहीं
मुकम्‍मल
कभी कि‍सी का
खुद को समझा तो लूं
तुम्‍हें
समझाने से पहले

मैं दरि‍या का पानी
तू पतवार
आ चूम लूं तुझको
फि‍र नई
चोट खाने से पहले

7 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 16-4-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1948 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 16-4-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1948 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  3. प्‍यार होता नहीं
    मुकम्‍मल
    कभी कि‍सी का
    खुद को समझा तो लूं
    तुम्‍हें
    समझाने से पहले

    बहुत ही खूबसूरत पंक्तियां।

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  4. सुन्दर प्रस्तुति .

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  5. बहुत खूब ... पर इस सफ़र में चोट तो खानी पड़ती है .., यही जीवन है ... सुन्दर रचना ...

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  7. मैं दरि‍या का पानी
    तू पतवार
    आ चूम लूं तुझको
    फि‍र नई
    चोट खाने से पहले

    excellent..

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