रूप का तिलिस्म जब अरूप का सामना करे, तो बेचैनियां बढ़ जाती हैं...
आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 16-4-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1948 में दिया जाएगा धन्यवाद
प्यार होता नहींमुकम्मलकभी किसी काखुद को समझा तो लूंतुम्हेंसमझाने से पहलेबहुत ही खूबसूरत पंक्तियां।
सुन्दर प्रस्तुति .
बहुत खूब ... पर इस सफ़र में चोट तो खानी पड़ती है .., यही जीवन है ... सुन्दर रचना ...
बहुत सुन्दर प्रस्तुति
मैं दरिया का पानीतू पतवारआ चूम लूं तुझकोफिर नईचोट खाने से पहलेexcellent..
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आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 16-4-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1948 में दिया जाएगा
ReplyDeleteधन्यवाद
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प्यार होता नहीं
ReplyDeleteमुकम्मल
कभी किसी का
खुद को समझा तो लूं
तुम्हें
समझाने से पहले
बहुत ही खूबसूरत पंक्तियां।
सुन्दर प्रस्तुति .
ReplyDeleteबहुत खूब ... पर इस सफ़र में चोट तो खानी पड़ती है .., यही जीवन है ... सुन्दर रचना ...
ReplyDeleteबहुत सुन्दर प्रस्तुति
ReplyDeleteमैं दरिया का पानी
ReplyDeleteतू पतवार
आ चूम लूं तुझको
फिर नई
चोट खाने से पहले
excellent..