जलते कपूर सा मेरा प्रेम....
दीप्त..प्रज्जवलितपान के पत्ते परजलते कपूर सा मेरा प्रेमजो तिरना चाहता हैअंतिम क्षण तकजलना चाहता हैऔर तुमचंचल नदी की तरहमुझे डुबोने को आतुर
क्या अल्पजीवी प्रेम भी मेरा
तुम्हें स्वीकार नहीं.......
तस्वीर--छठ पर्व के समय दीप प्रज्जवलित करते परिजन
शानदार
ReplyDeleteसुंदर प्रस्तुति.
ReplyDeleteमहाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ.
क्या अल्पजीवी प्रेम भी मेरा
ReplyDeleteतुम्हें स्वीकार नहीं.......
क्या कहूँ अब?
सब स्वीकार है। निराशा के भ्रमजाल से मुक्त हों, यह कामना है।
ReplyDeleteमहाशिव रात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ
ReplyDeleteनिश्चित रूप से कवित्त मुझे आपसे सीखना होगा। आज से आप मेरी गुरू!
ReplyDeleteक्या अल्पजीवी प्रेम भी मेरा
ReplyDeleteतुम्हें स्वीकार नहीं.......बहुत खूब !!