प्यार करते हो
.....हां, बेशुमार, बेइंतहा
.....हां, बेशुमार, बेइंतहा
मुझ पर है यकीन ?
.....खुद से ज्यादा
.....खुद से ज्यादा
पता भी है कितना प्यार है तुमसे....
चुप पसरी
चुप पसरी
......तुम समुंदर हाे, बस इतना जानता हूं
मुझे लगा तुम इश्क की गहराई है समुंदर सी कहोगे...पर तुम लहरें गिनते रहे....लाल सूरज समुंदर में डूब गया.....आकाश पर लहू छितरा है...
कोई निशान नहीं.....रेत सा इश्क तुम्हारा...तुम पानी से...
तस्वीर....कल के बारिश की

umda
ReplyDeleteवाह!!
ReplyDeleteआपकी इस पोस्ट को शनिवार, ३० मई, २०१५ की बुलेटिन - "सोशल मीडिया आशिक़" में स्थान दिया गया है। कृपया बुलेटिन पर पधार कर अपनी टिप्पणी प्रदान करें। सादर....आभार और धन्यवाद।
ReplyDeleteआपकी इस पोस्ट को शनिवार, ३० मई, २०१५ की बुलेटिन - "सोशल मीडिया आशिक़" में स्थान दिया गया है। कृपया बुलेटिन पर पधार कर अपनी टिप्पणी प्रदान करें। सादर....आभार और धन्यवाद।
ReplyDeleteलाजवाब रचना। अच्छा लगा पढ़कर
ReplyDeletehttp://chlachitra.blogspot.in
http://cricketluverr.blogspot.in
निःशब्द करते भाव ..
ReplyDeleteबहुत सुन्दर कविता
ReplyDeletebahut acchi rachna
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